Author: Anamika Amitabh Gaurav

मानव और प्रकृति

आज से चार महीना पहले तक हर कुछ सामान्य था शायद सिर्फ रिश्ते असामान्य हो रहे थे ।
सब कुछ अपनी ही धारा में चल रही थी और फिर कोरोनावायरस आया।
हर कुछ बदल गया मेरा ऐसा मानना है कि, कोरोनावायरस सिर्फ मजदूरों को ही नहीं यह हर किसी को प्रभावित कर रहा है । ऐसा कोई घर नहीं है जो इस वायरस से होने वाली समस्याओं से न जूझ रहा है। अगर हम अपने आसपास नजर घुमाते हो तो देखते हैं कितने हमारे ऐसे मित्र होंगे जिनकी नौकरी छूट गई है कितने ऐसे होंगे जिन्हें महीनों तक सैलरी मिलने की उम्मीद नहीं होगी अगर हम सोचने बैठे तो देखते हैं कि हमने ऐसा क्या कर डाला जिससे हमें इतना कुछ सहना पड़ रहा है ।
तो मुझे अपनी ही रचित पंक्तियां याद आती है —–

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पायल

पायल को गहना ही रहने दो
बेरिया मत बनने दो।।
पैरों में पायल की छनछन सबको अच्छी लगती है,
वही पायल पैरों की बेडियां बन जाए तो,
उस छन छन में एक दर्द सुनाई देती है
पायल को गहना ही रहने दो
बेरिया मत बनने दो।।।

कहती है बेटियां सारी ,
पायल ही पहनाओ मुझे ,
मत बेड़ियों में जकड़ो मुझे ,
मैं भी इंसान हूं आसमान में उड़ने दो मुझे,

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बिंदी

बिंदी”

ये जो कुछ स्त्रीयाँ है
रहती है कैद चार-दीवारी में ,
बुनतीं हैं सपनें..
पकाती हैं ख्वाब..
..कुढती रहतीं हैं
बर्तनों पर
..झुलसती है बूंदों की तरह ,
पर पहनती हैं बिंदी ।

ये जो कुछ स्त्रीयाँ
सजती भी हैं और
सवंरती भी हैं..
इतराती फिरती हैं
..बनकर “सिंबल”
“हाई-सोसायटी” की ,
पर, भूल जाती हैं
अपनी ही पहचान ,

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पथिक

मत घबरा ए पथिक

मिल जाएगी तेरी तकदीर

श्रम और आत्म विश्वास के

संकल्प से ही

क्योंकी मंजिल पाने के लिये नहीं है कोई और विकल्प ।

पौ फटने से पहले का घना अँधेरा

लाता है एक नया सवेरा

दिखाता है निराशा मे आशा की एक तस्वीर

तनिक तो धीरज धरो पथिक बदल जायेगी तेरी तकदीर ।

बस दुख मे कभी भी ना घबराना

जीवन के संघर्षों से ना डर जाना

युवा शक्ति के वीर हो तुम

बदलना है तुम्हे तकदीर अपनी

अब तो उठ बना एक रास्ता

बिना रूके तु चलते जा

मत घबरा रे पथिक

पार करते जा तू हर बाँधा

संघर्षों से लड़ते जा

अपनी तकदीर बदलने के लिए

हर शौक को त्याग दो

चलते रहो बस चलते रहो

तनिक धीरज रखो पथिक बदल जायेगी तेरी तकदीर ।

जैसे नयी सुबह लाने के लिए सूरज को तपना पडता है

धरती कि प्यास बुझाने के लिए बादल को फटना पडता है

जैसे मंजिल तक ले जाती है आशा की एक लकीर

वैसे ही तनिक धीरज रखो पथिक

बदल जायेगी तेरी तकदीर ।

जैसे कुन्दन बनता है सोना जब भट्टी मे तपाया जाता है

चमक दिखाता है हीरा जब पत्थर से घिसाया जाता है

श्रममार्ग के पथिक बनो अवरोधों से जा टकराओ

मंजिल पर पहुँचोगे अवश्य बस रुको नहीं बढते जाओ

बदल जायेगी तकदीर

तनिक धीरज रखो पथिक
बदल जायेगी तेरी तकदीर।

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स्त्री

हमारे श्रृंगार को समझो ना हमारी कमजोरी
हमारी मर्यादा को समझो ना हमारी बेरी
हम ही वह है जो समुद्र लांघ गए हम ही वह है जो ही एवरेस्ट फतह कर गए
हम ही वह है जो आसमान को छू लिए ।
अगर हमारे त्याग की गाथा लिखो तो
तुम्हारी स्याही खत्म हो जाएगी
अगर हमारे बलिदान की कहानी पढ़ो तो
तुम्हारे पन्ने कभी खत्म ना हो पाएंगे
हम स्त्री हैं हम अपनों की खुशी और मर्यादा के लिए कुछ भी कर जाएंगे।।

अनामिका अमिताभ गौरव ✍️

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परछाई

कल ,
वो साथ मेरे चल रही थी।
पूछा मैंने रूक कर उससे ,
एक बात तो बताओ,
होती है जब भी रौशनी,
तो हर पल साथ निभाती हो,
होते ही अँधेरा क्यूँ ,
तुम गुम कही हो जाती हो।
खामोश रही वो कुछ पल,
बोली फिर मुस्करा कर ।
नादान हो तुम कितने,
कुछ भी नहीं समझते ।
सुख के सभी है भागीदार ,

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मेंहदी

कुदरत की एक अनमोल देन है

मेंहदी

निखर जाती है
स्त्री के हाथों की सुंदरता
जब लगी हो हाथों में मेहंदी ।

कहते है सब

मेहंदी और बेटी
लगती जैसे बहनें हो आपस में
महकती और निखरती जाए
जब लगी हो स्त्री के हाथों में मेहंदी ।

मेहंदी भी जाती है बेटी के
संग ससुराल में
बाबुल की यादों के
बेटी आंसू कैसे पोंछे
जब लगी हो हाथों में मेहंदी ।

जब न होगी बेटियां
तो किसे लगाएंगे मेहंदी
होगी बेटियां तब ज्यादा
रचेगी मेंहदी।

अनामिका अमिताभ गौरव ✍️

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अभिमान

कहानी – अभिमान

एक कलाकार नाव में बैठकर नदी पार कर रहा था. अपने कला के ज्ञान पर उसे बड़ा अभिमान था. वह जिससे भी मिलता, उसके समक्ष अपने कला के ज्ञान का बखान कर उसे नीचा दिखाने का प्रयास किया करता था.

नाव खेने वाले मल्लाह से उसने कला की बहुत प्रशंषा की और फिर उससे पूछा, “क्यों भाई? क्या तुमने किसी भी कला में ज्ञान हासिल की है

वह मल्लाह अनपढ़ था.

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शहीद

आज एक बार फिर आया समय
याद करो उनकी कुर्बानी को
पाकिस्तानी सेना को जिसने किया परास्त
भारत के उन वीर जवानों को।

दुश्मनों को मार गिराया
कारगिल की चोटी पर तिरंगा लहराया
परास्त किया उनकी चालों को
श्रद्धा सुमन अर्पित भारत के उन वीर जवानों को।

बर्फ पर रहकर दुश्मनों को मार गिराया
रात भर जागकर मां को बचाया
खुद गोली से छलनी होकर तिरंगे की लाज बचाया
आओ याद करें भारत के उन रणबांकुरो को।

पूरा भारत सकून से सोए
इसलिए सीमा पर वह सपूत जागे
खाए गोली सीने पर हमें बचाने को
मत भूलो कारगिल के उन वीर शहीद जवानों को

अनामिका के तरफ से श्रद्धांजलि कारगिल युद्ध में शहीद हुए वीर जवानों को🙏🙏

अनामिका अमिताभ गौरव ✍️

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शिव

तुम हो शिव का गहना,
रहते उनके पास ,
सदा कंठ में लिपटे रहते ,
और मनवा ते अपनी बात।

विष्णु के तुम शय्या,
रहते विष्णु सदेव तोहरे पास।

समय परी जब सबको,
तब समुद्र मंथन में साथ
निभाया
डोल रही धरती का तू ने अपने माथे भार उठाया ।

कष्ट हरो है कष्ट हरो
हे सर्पों के देवता,

नाग देवता आओ तुम विश्व का कल्याण करो ।
हर विष को पी लो अब तुम विश्व की रक्षा करो ।
विश्व की रक्षा करो ।
नाग पंचमी की हार्दिक बधाई

अनामिका अमिताभ गौरव ✍️

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