Author: Dr Rahul Aggarwal

ਬਾਪੂ (Baapu)

ਬਾਪੂ ਤੇਰੀ ਉੰਗਲੀ ਫਡ ਫਿਰ ਤੋ ਉਡਨਾ ਚਾਹੁਨਾਂ ਹਾ ।
ਮੂੜ ਆਜਾ ਵਾਪਸ ਇਹਨਾਂ ਤੂੱ ਕਿਉ ਸਤਾਉਨਾ ਹੈ ।।
ਕੀ ਹੋਇ ਮੇਥੋ ਗਲਤਿ ਵੇ ਤੂ ਐ ਸਮਝਾ ਜਾ ਵੇ ।
ਮੂੜ ਕਿਓ ਨੀ ਆਓਂਦਾ ਕੁਝ ਤਾ ਮੈਂਨੂੰ ਬਤਾ ਜਾ ਵੇ ।। १ ।।

ਕੱਲ੍ਹਾ ਕੱਲ੍ਹਾ ਹਾਂ ਸਭ ਕੁਝ ਖਾਲੀ ਖਾਲੀ ਐ ।
ਮੈ ਬੂੱਟਾ ਤੇਰੇ ਬਾਗਾਂ ਦਾ,

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पथिक

चल पड़ा था पथिक उस राह की ओर।
उबड़ खाबड़ रास्ता, तिरछे कंटीले जिसके मोड़।।
था वो बेखबर खुद से,अनजान ओरो से।
चला मंजिलो को पाने का सपना
लिए नयनो के कोरो मे।।
वो तो बस सवार अपनी धुन मे था।
मंजिलो को पाने की उधेरबुन मे था।।
कई मिले राही उसे बीच राह मे।
थामे निराशाओ की गठरी को बांह मे।।
कईयो ने बीच सफर मे हौंसले तोड़े,

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तेरा चेहरा

 

तेरा चेहरा मेरी गजल सा है।
रोज पढने को जी चाहता है।।
है हजारो ख्वाब इसमे,
रोज ढूबने को जी चाहता है।।

चांद भी तेरी अदा का कायल है।
जो रात भर तुझे देखता रहा।
मेरा चांद तो एक तू ही है।
रोज देखने को जी चाहता है।।

ये जुल्फे भी तुझ पर फिदा है।
बिखरी है तेरे हसीं चेहरे पर।
चुमती है हर दम तेरे गालो को
रोज छूने का जी चाहता है।

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वो पिता ही है

 

जिसके दौड़ने से घर का चूल्हा जलता है।
वो पिता ही है जिसके कारण घर चलता है।।
वो है तो, घर के आंगन की दोपहर भी सवेर है।
बिन उसके कहां ये दिन भी गुजरता है।।

वो पिता ही है………………(1)

समंदर मे बन चट्टान वो हर तूफान से लड़ता है।
बन नौका पतवार चीर लहरो को आगे बढता है।।
कितना भी हो दूर,

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छांव

बरसो बाद आज तारो की छांव मे सोया हूॅ।
औढ इसके आंचल को खुद मे कही खोया हूँ।।

लापता है ये दिल यही कही किसी तलाश मे
नजर नही आता वो ,अश्को से आंखे धोया हूं।

मुद्दत बाद ठहरा था जो मेरे दिल के आंगन मे।
सुना पडां है वो मकां , क्या काटा क्या बोया हूं।।

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