Author: Shubham Kumar

हक है..

हक है हमें दुनिया बदलने का ,

हक है हमें गिर कर संभलने का ।

चाहे मंजिल मिले न मिले मुझे पर हक है हमें उन राहों पे चलने का।

है आंखों में सपना कुछ करने का

हक है हमें वो सपना सच करने का।

होगी कांटों भरी राहें जिंदगी में पर

हक है हमें उन राहों पे चलने का।

है रास्ते अंगारों से भरी ,पर जज्बा है इन अंगारों को पार करने का।

जल जायेंगे अंगारों से पांव मेरे पर ,

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