Satire

दर्द वाला डाॅक्टर

 

घर के दरवाजे पर टँगी नाम-पट्टिका पर ‘डाॅक्टर‘ नाम चढ़ते देखना, सारे मुहल्ले वालों के लिए काफी आश्चर्यजनक घटना थी।

वैसे गंगाधर जी के भाषा-ज्ञान का उतना अनुभव न होता, तब तो उतनी ही सलवटें हमारे माथे पर भी पड़तीं। परंतु हम अनुभवी थे। हकीकत जानते थे। उनकी विद्वत्वता पर पूरा भरोसा था। आखिर होता भी क्यों न? दो-चार पोथियाँ तो हम ही से लेकर स्थायी उधार कर गये थे। उनमें से एक लौटाने का मौका भी आया था। बिल्कुल चपल प्रतिक्रिया की थी उन्होंने।

बस पता ही चला था उन्हें कि हमारे गाँव वाले भतीजे को किताब के आठ-दस पन्नों का ज्ञान बटोरना है। उसी दिन झाड़-पोछकर निकाल सामने रख ली थी। वरना उससे पहले तो बिल्कुल सहेजकर रखी थी हमारी किताब उन्होंने अपने दड़बे में। हमसे बात होने के बाद घंटे भर में नोट्स पूरे करके,

Read More
दे दनादन… वोट…: आखिरी PART
  • By Ashish Anand Arya "Ichchhit"
  • |
  • Satire
  • |
  • 219 Views
  • |
  • 0 Comment

Part 1: https://rentreadbuy.com/index.php/2020/07/05/de-danadan-vote-1

Part 2: https://rentreadbuy.com/index.php/2020/07/06/de-danadan-vote-2

Part 3: https://rentreadbuy.com/index.php/2020/07/07/de-danadan-vote-3

Part 4: https://rentreadbuy.com/index.php/2020/07/08/de-danadan-vote-4

Part 5: https://rentreadbuy.com/index.php/2020/07/09/de-danadan-vote-5

Part 6: https://rentreadbuy.com/index.php/2020/07/10/de-danadan-vote-6

Part 7: https://rentreadbuy.com/index.php/2020/07/11/de-danadan-vote-7

Part 8: https://rentreadbuy.com/index.php/2020/07/21/de-danadan-vote-8

Part 9: https://rentreadbuy.com/index.php/2020/07/22/de-danadan-vote-9

किन्नरों से क्षणिक भेंट सदैव की तरह बहुत रोचक थी। इसके पल-पल के रोमाॅच का मैंने अनुभव किया था। परंतु किन्नर अपनी धन-लोलुपता के कारण अपने जीवन के अवश्यंभावी लगते रोमाॅचक क्षणों से हाथ धो बैठे थे। हाॅ,

Read More
दे दनादन… वोट…: PART – 9
  • By Ashish Anand Arya "Ichchhit"
  • |
  • Satire
  • |
  • 182 Views
  • |
  • 0 Comment

Part 1: https://rentreadbuy.com/index.php/2020/07/05/de-danadan-vote-1

Part 2: https://rentreadbuy.com/index.php/2020/07/06/de-danadan-vote-2

Part 3: https://rentreadbuy.com/index.php/2020/07/07/de-danadan-vote-3

Part 4: https://rentreadbuy.com/index.php/2020/07/08/de-danadan-vote-4

Part 5: https://rentreadbuy.com/index.php/2020/07/09/de-danadan-vote-5

Part 6: https://rentreadbuy.com/index.php/2020/07/10/de-danadan-vote-6

Part 7: https://rentreadbuy.com/index.php/2020/07/11/de-danadan-vote-7

Part 8: https://rentreadbuy.com/index.php/2020/07/21/de-danadan-vote-8

निर्जीव वस्तुओं के प्रेरणा-परक आख्यान से मैं अभिभूत था। हालाॅकि मन में अटकलें थीं। तथापि कुछ सहमते हुए,

Read More
दे दनादन… वोट…: PART – 8
  • By Ashish Anand Arya "Ichchhit"
  • |
  • Satire
  • |
  • 691 Views
  • |
  • 0 Comment
दे दनादन… वोट…: PART – 7
  • By Ashish Anand Arya "Ichchhit"
  • |
  • Satire
  • |
  • 174 Views
  • |
  • 0 Comment

Part 1: https://rentreadbuy.com/index.php/2020/07/05/de-danadan-vote-1

Part 2: https://rentreadbuy.com/index.php/2020/07/06/de-danadan-vote-2

Part 3: https://rentreadbuy.com/index.php/2020/07/07/de-danadan-vote-3

Part 4: https://rentreadbuy.com/index.php/2020/07/08/de-danadan-vote-4

Part 5: https://rentreadbuy.com/index.php/2020/07/09/de-danadan-vote-5

Part 6: https://rentreadbuy.com/index.php/2020/07/10/de-danadan-vote-6

देश की संस्कृति के निर्माण में देश के ऐतिहासिक और पौराणिक तथ्यों का सबसे बड़ा योगदान होता है। हमारे देश के संदर्भ में ऐसे नाना उल्लेख उपस्थित हैं,

Read More
दे दनादन… वोट…: PART – 6

बाॅस के कमरे के द्वार पर दस्तक देते समय मैं रणबाॅकुरा अकेला था।

दस्तक की आहट भर से दस्तक देने वाले का ज्ञान कर लेना, अंर्तयामियों का कृत्य था। बाॅस बड़े जरूर थे, पर इतने नहीं कि मायावी कृत्यों को संपन्न कर सकें। स्वयं के मानवीय स्वरूप को उन्होंने अपने प्रश्न द्वारा प्रेषित किया-
‘‘कौन है?‘‘
प्रश्न के ठीक उपरांत, अपने नाम के उच्चारण द्वारा, बाहर खड़े-खड़े ही मैंने उत्तर अंदर मौजूद बाॅस तक पहुॅचा दिया।
उत्तर की आवाज बाॅस के कानों में पड़ते ही,

Read More
दे दनादन… वोट…: PART – 5

Part 1: https://rentreadbuy.com/index.php/2020/07/05/de-danadan-vote-1

Part 2: https://rentreadbuy.com/index.php/2020/07/06/de-danadan-vote-2

Part 3: https://rentreadbuy.com/index.php/2020/07/07/de-danadan-vote-3

Part 4: https://rentreadbuy.com/index.php/2020/07/08/de-danadan-vote-4

बाइसिकल पर बैठे-बैठे मैं विभिन्नताओं से परिपूर्ण विभीषिकाओं की एकता का गवाह बनता रहा। कई क्रमिक घटनाक्रमों को मैंने अपने नयनों के भीतर कैद किया। चलती हुई मेरी बाइसिकल फिर अगली बार तब ही रूकी,

Read More
दे दनादन… वोट…: PART – 4

Part 1: https://rentreadbuy.com/index.php/2020/07/05/de-danadan-vote-1

Part 2: https://rentreadbuy.com/index.php/2020/07/06/de-danadan-vote-2

Part 3: https://rentreadbuy.com/index.php/2020/07/07/de-danadan-vote-3

ऊपर वाले की महिमा एवं उसकी समझदारी का मैं कृतज्ञ था। एक उपर वाला ही तो था, जिसे खुद के बनाये गये मुझ जैसे दुर्लभ प्राणी के बारे में सर्वस्व ज्ञान था। साँस लेना जीवन के लिए सर्वाधिक आवश्यक प्रक्रिया होती है। इस प्रक्रम हेतु जिस उर्जा की आवश्यकता होती है,

Read More
दे दनादन… वोट…: PART – 3

Part 1: https://rentreadbuy.com/index.php/2020/07/05/de-danadan-vote-1

Part 2: https://rentreadbuy.com/index.php/2020/07/06/de-danadan-vote-2

नेताजी द्वारा प्रदत्त स्वयं के अभिनव शक्ति ज्ञान से अभिभूत, मैं अपने घर के अंदर दाखिल हुआ। विचारों में आसमान में घूमती मेरी नजरें, सहसा ही सामने की दीवार पर टंगी समय-सूचिका पर पहुॅची। मैं तुरंत ही जड़ रूप में परिवर्तित हो गया। समय की सुईयों पर नजरें टिकाये-टिकाये मैं अब स्मरण कर सकता था,

Read More
दे दनादन… वोट…: PART – 2

Part 1: https://rentreadbuy.com/index.php/2020/07/05/de-danadan-vote-1

नेताजी के प्रस्थान के उपरांत मैं पुनः प्रत्येक भोर की तरह अकेला था। परंतु आज दिन के प्रतिपादन के लिए सामने नवीन संस्करण थे।

मेरे हाथों में मौजूद डिब्बे के अन्दर क्या था, मैं नहीं जानता था। पर कुछ उसके अंदर था, क्योंकि उससे उत्पन्न होती सुगंधित वायु, मेरे नथनों तक पहुॅचकर, मुझे विवश कर रही थी कि मैं डिब्बे के बाहरी आवरण को तहस-नहस कर दूॅ। सुगंध का स्त्रोत जानने के लिए मशक्कत मुझे ही करनी थी।

मैंने खुले हुुए किवाड़ सहसा ही बंद कर दिये। अंदर आते ही खाली बर्तन को एक कोने में रखा। फिर तुरंत ही अंदर का बालपन जैसे जाग उठा। बिल्कुल झपटते हुए,

Read More
X
WhatsApp WhatsApp us