Short Story

A Non-Character Fairy

A fairy who knows to fly, who know the levitation. But in this tale, I am not going to share some imaginary or innovative streams of ideas related to fairy tales. The concept of this story based on common issues. Let’s see forth.

This was my one of worst memory when I was in 2nd standard. This past was still is in my mind in concrete way. So, now imagine how worst it is.

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ITS BEEN YEARS TO KISS

When a girl or a boy comes in a relationship, the very first thing that should be done is a kiss, felt like a butterfly stomach, pink sky, blotted mid, greenery environment, wavy winds, freaky clouds eve periods become the most lovable things.

A girl sitting in her house alone, with no great stuff hanging her, loaded with memories of her excellent running relationship. But wait…. what relation, a kind of shit she has been experiencing from the last few years without her partner.

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Can you write in English?

Can you write in English?

-By Dr  Iram Fatima

 

It was a Sunday afternoon. Bulbul was trying her hands at her Culinary Skills. A dear friend was coming for lunch at Bulbul’s place. Bulbul was a renowned personality in Delhi.  She was a Professor of English at Miranda House of University of Delhi. She was an editor-in-chief of many literary journals. She earned a good name and reputation in Delhi after coming fom Lucknow,

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अभिमान

कहानी – अभिमान

एक कलाकार नाव में बैठकर नदी पार कर रहा था. अपने कला के ज्ञान पर उसे बड़ा अभिमान था. वह जिससे भी मिलता, उसके समक्ष अपने कला के ज्ञान का बखान कर उसे नीचा दिखाने का प्रयास किया करता था.

नाव खेने वाले मल्लाह से उसने कला की बहुत प्रशंषा की और फिर उससे पूछा, “क्यों भाई? क्या तुमने किसी भी कला में ज्ञान हासिल की है

वह मल्लाह अनपढ़ था.

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🙅 ज़िद्दी लाडो 🙅

बचपन में जो भी बारिश नज़र के सामने आयी, उसने खूब कागज़ की कश्तियाँ देखी मेरे हाथों में। खूब चींटे-चीटियों को सैर करायी अपनी उन अरमान भरी कश्तियों में। और अगर जो उम्र की दहलीज़ ने पाँवों में ये समझदारी की बेड़ियाँ न बांध दी होतीं, फ़िर तो ज़रूर पूरी दुनिया ही सफ़र कर चुकी होती मेरी उन कागज़ी कश्तियों में और न जाने कितने चक्कर लग चुके होते इस पूरी दुनिया के!

खैर,

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ऐ वतन… हमको तेरी कसम…

“काश, इन गिरती आसमानी बिजलियों को रोकना भी इतना आसान काम होता!”
लगातार ऊँचे आकाश पर निगाहें टिकाये रत्नेश के होठों पर ये बिल्कुल लाज़िमी सवाल था। कई साल फ़ौज की सेवा में गुज़ारने के बाद अब तो उसे जैसे हर काम को ही चुटकियों में खत्म कर डालने की आदत हो गयी थी। पर ये सब तो जैसे कुदरत का कहर था, जिस पर उस जैसे किसी का कोई बस न था।

शाम ढलने को हो आयी थी। रात का अंधेरा आसमान को अपने काले रंग से गहराने पर उतारू था। और उसी बीच मानसूनी बारिश और कड़कती आसमानी बिजलियों का वो रोज़ का सिलसिला एक बार फ़िर से शुरू हो चुका था। इस मानसून और इसी बारिश का तो वहाँ जैसे हर किसी को ही इंतज़ार था,

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“পোস্টমর্টেম রিপোর্ট”  (Postmortem Report)

পর্ব : ১
“সাগ্নিক কুন্ডু” ও “তনুরিমা চক্রবর্ত্তী” দুজনের নামের নিচেই অনলাইন লেখা কিন্তু দুজনের মধ্যে কোনো মেসেজের আদান প্রদান নেই । বিগত দুমাস ধরে পরস্পরের সাথে কথাবার্তাও বন্ধ । মাঝেমধ্যেই এরকম হয় । দুজনের পারষ্পরিক এই লড়াইয়ে সম্পর্কটা কোথাও গিয়ে যেন নিজের অস্তিত্ব হারিয়ে ফেলে । থাকতে না পেরে কিছুক্ষণ পরে তনু নিজেই মেসেজ করলো ।
*~ওই!
#>হম্ রে বল !
*~ ‎কি করছিস?

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मनोरंजन कहानी

एक समय की बात है, जंगल में 3 दोस्त रहते थे। एक शेर जिसका नाम शुबू था और एक हाथी जिसका नाम मालू था, बहुत ही अच्छे दोस्त थे। वे जिस झील से पानी पीते थे उसमे एक मछली रहती थी उसका नाम बानी था। मालू और शुबू की बनी से भी दोस्ती हो गई, शुबू और मालू बानी के लिए खाना लाते थे । एक दिन शूबु के मन में लालच आ गया और उसने सोचा क्यों ना मैं बानी को मार के खा जाऊ पर मालू ऐसा नहीं चाहता था। मालू ने बानी को बचा लिया और शुबु से दोस्ती तोड़ दी। अब शूबू अकेले ही रहता है।

इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें दूसरों के बारे में बुरा नहीं सोचना चाहिए।

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अभिमान

कहानी – अभिमान
: एक कलाकार नाव में बैठकर नदी पार कर रहा था. अपने कला के ज्ञान पर उसे बड़ा अभिमान था. वह जिससे भी मिलता, उसके समक्ष अपने कला के ज्ञान का बखान कर उसे नीचा दिखाने का प्रयास किया करता था.

नाव खेने वाले मल्लाह से उसने कला की बहुत प्रशंषा की और फिर उससे पूछा, “क्यों भाई? क्या तुमने किसी भी कला में ज्ञान हासिल की है

वह मल्लाह अनपढ़ था.

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शक्ति-पुँज & आचार्य अदग : PART-4

Part 1: https://rentreadbuy.com/index.php/2020/05/30/shakti-punj-acharya-adag

Part 2: https://rentreadbuy.com/index.php/2020/06/02/shakti-punj-acharya-adag2

Part 3: https://rentreadbuy.com/index.php/2020/06/06/shakti-punj-aur-acharya-adag-part3

पिछले खण्ड से आगे…
गुजरती समय की घड़ियों के साथ युवा होते वश्य की दक्षता और निपुणता को देख आचार्य को यह आभास स्पष्टहोने लगा था कि वो जल्द ही उसे उत्तरदायित्व की कोई बहुत बड़ी सौगात सौंपने जा रहे हैं। पर अभी तक उन्होंने कभी भी कुछ भी स्पष्ट रूप से कहा नहीं था। इधर शिक्षा और दीक्षा का प्रक्रम यथावत् वश्य को लगातार सक्षम करता जा रहा था कि एक दिन यकायक ही बहुत अकस्मात् परिस्थितियाँ उत्पन्न हो गयीं।

उस दिन जब आचार्य प्रतिदिन की तरह प्रातः स्नान के लिए कुटिया के निकट बहने वाली नदी की ओर जा रहे थे,

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