Writer’s Corner

वक्त

ज़िन्दगी बदलती है वक़्त के साथ ,

वक़्त बदलता है ज़िन्दगी के साथ,

वक़्त नहीं बदलता अपनों के साथ ,

अपने बदल जाते हैं वक़्त के साथ!

 

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जबरदस्ती

दुरीया अच्छी लगने लगी है

अब मुझे ,

किसी से जबरदस्ती का

रिश्ता रखने से,

किसी पर  अपना हक जताने से !

 

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A Non-Character Fairy

A fairy who knows to fly, who know the levitation. But in this tale, I am not going to share some imaginary or innovative streams of ideas related to fairy tales. The concept of this story based on common issues. Let’s see forth.

This was my one of worst memory when I was in 2nd standard. This past was still is in my mind in concrete way. So, now imagine how worst it is.

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Vitamin B Complex and Health.

 

Why we Need Vitamin B Complex ? 

The Vitamin B Complex comprises of the essential B Vitamins – Vitamin B1, Vitamin B2, Vitamin B3, Vitamin B5, Vitamin B6, Vitamin B9, Vitamin B12 plus the vitamins Biotin, Choline and Inositol. Vitamin B Complex is needed for the proper functioning of almost every process in the body.  

1. Energy Production

Vitamin B1 is needed to help convert the carbohydrates we eat into glucose.

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जिंदगी

है गम नहीं कि,
खर्च हो रहा हूँ,
जिंदगी के सारे,
मर्ज ढ़ो रहा हूँ,
ज़रा मुगालते
में था अब तक।
अब सिर्फ अपने,
सपने जी रहा हूँ.

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Sweet Poison : Aspartame (sugar free)

 ‘Aspartame’ marketed as ‘Nutra Sweet’ ‘Equal’ and ‘Spoonful’. In the keynote address by the EPA, it was announced that in the United States in 2001 there is an epidemic of multiple sclerosis and systemic lupus. It was difficult to determine exactly what toxin was causing this to be rampant. 

Why Aspartame is so dangerous: When the temperature of this sweetener exceeds 86 degrees F, the wood alcohol in ASPARTAME converts to formaldehyde and then to formic acid,

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माता-पिता

नहाने को पुछा न पानी गरम
हड्डियों को गंगा नहलाते हे वो
माता- पिता को आदर न दिया
और पंडित को शिश झुकाते हे वो
माता-पिता को न पुछा भोजन कभी
और हर साल बरसी मनाते हे वो
जीते जी हँसते हुए दर्द दिया इतना
मरने के बाद रो कर शोक मनाते हे वो

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पापा

किताबों से नहीं,

मेंने रास्तों की ठोकरों से सिखा है,

कि किताबों से नहीं  ,मेंने रास्तो की

ठोकरों से सिखा है

लाखों मुश्किलों में भी हसना

मैंने अपने पापा से सिखा है |

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आसूं

 

मुझे मनाने के लिए

उसका एक बार

मुस्कुरा कर देखना

ओर बोलना ही काफी है ,

लेकिन उसको

मनाने के लिए

मेरे लाखों आसूं

भी कम लगते हैं

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डिजिटल सावन

सावन आया है या अब वातावरण नहीं मोबाइल बता रहे हैं ।अचानक कुछ दिन पहले कोयल के बोलने की आवाज सुनी तो मैं हैरान हो उठी तो बाहर निकल कर देखा तो कुछ बच्चे कोयल का चित्र लगाकर पीछे से मोबाइल से कोयल की बोलने का रिंगटोन बजा रहे थे मानो सावन आने का अनुभव कर रहे हो । फिर मेरी भेज जिज्ञासा जाग गए पेड़ों को झूमता देखने की लेकिन इमारतों से गिरे शहर में पेड़ कहां मिलते हैं तो मैंने भी यूट्यूब खोला और लहराते पेड़ों का वीडियो देखकर मन बहला लिया । अब हवाओं की सरसराहट नहीं वाहनों का शोरगुल सुनाई दे रहा था ,कोयल की जगह कारखानों का शोर था ,फलों में मिठास की जगह दवाओं की खटास थी और मौसम भी अपनी रंगत की जगह कहर मचा रहा था । कुछ लोग कह रहे थे सावन तो आया बरसात नहीं आया और जहां आया वह इतनी की बाढ़ से लोगों में कोहराम मच गया । सावन तो हम जैसों के लिए सामान्य था जो इमारतों से घिरे थे ।

अब तो सावन का पता हर सोमवार को व्हाट्सएप या फेसबुक स्टेटस पर देख लगा लिया जाता है । सोमवारी आते हैं डीपी भोलेनाथ के चित्र में बदल जाती है। साथ ही सोमवार के सोमवार महादेव भी अपडेट होते जा रहे हैं । चिड़ियों की चहचहाहट और मोर का नृत्य भी ग्राफिक्स में ही दिखता है। यह डिजिटल सावन है। अब कवियों की शायरी और गुलजार गीतों के बजाय सावन का हिप हॉप और रैप ट्रेंड कर रहा है। अब तो इंडिया इतना डिजिटल हो गया है कि लोग  एक दूसरे से मिलने में भी हिचकिचाते हैं। सावन की हरियाली तो नोटों में भी दिखने लगी है जो लोग सावन आया  कहकर धूम मचाते थे अब नोटों की गर्मी दिखा रहे हैं।

सावन आते ही हवाओं में ताजगी आती थी,

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