Samranjali Kahani Sangrah (hindi) by Ashish Anand Arya 'ichchhit'
Author: ASHISH ANAND ARYA
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होना सैनिक... स्वयं सम्मान है ... जिस पर जीता देश... परम अभिमान है... रचयिता रौद्र रक्त के रण तले... शांति के सबल स्तंभों के... जिस जीवन का अर्थ... अदम्य स्वाभिमान है... इसी स्वाभिमान से लबरेज... देश की कठोरतम सीमाओं पर देश की समृद्धता के प्रहरी बनकर जुटे वीरों के बीच से लेखनी पर मेहरबान सक्षम नगीनों को तलाशना और फिर तलाशे गए इन लेखकों की फौजी शब्दों से लब्ध लेखनी को साहित्यिक रूप में तराशना एक चुनौती पूर्ण कार्य होता है। फिर भी यह चुनौती इस पुस्तक के संपादक द्वारा स्वीकारी गयी! संपादक ने लिखा है : "यह, जिसे मैं चुनौती कह रहा हूँ, मैंने स्वीकारी, क्योंकि इसका मैंने प्रण लिया था... मैंने बीड़ा उठाया था.... क्योंकि मैं नहीं चाहता था कि लगातार कोशिशों के बावजूद केवल एक कारण से कि मैं फौजी था, मैं इतने वर्षों तक बस एक ज़रिया भर तलाशता रहा कि काश किसी जरिए से स्वयं पर बरसती माँ सरस्वती की कृपा को अपने जैसे ही ढेरों मानवों के सम्मुख दर्शनीय रूप में प्रस्तुत कर सकूँ... वैसा मेरे जैसे हर फौजी के साथ घटित हो! कला का निःस्वार्थ पुजारी होने के बावजूद मैं एक ऐसा मन्दिर न पा सका, जहाँ मैं जीवन की इन अमूर्त खुशियों का वंदन कर, असीम शांति, असीम आनंद वाला सानिध्य प्राप्त कर सकूँ, वैसा इंतजार हर किसी को करना पड़े! इसीलिए क्षमताओं के अनन्य वैभव से परिपूर्ण, अस्त्र-शस्त्रों के धारक स्वयं जैसे ही दे...